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Monday, 11 March 2013

जनम तौ ऐसेहिं बीत गयौ...



जनम तौ ऐसेहिं बीत गयौ।
जैसे रंक पदारथ पाये, लोभ बिसाहि लयौ॥
जनम तौ ऐसेहिं बीत गयौ।

बहुतक जन्म पुरीष परायन, सूकर-स्वान भयौ।
अब मेरी – मेरी कर बौरे, बहुरौ बीज बयौ॥
जनम तौ ऐसेहिं बीत गयौ।

नर कौ नाम पारगामी हौ, सो तोहि स्याम दयौ।
तै जड़ नारिकेल कपि-कर ज्यौं, पायौ नाहिं पयौ॥
जनम तौ ऐसेहिं बीत गयौ।

रजनी गत बासर मृगतृष्णा, रस हरि कौ न चयौ।
सूर नन्द-नन्दन जेहिं बिसरयौ, आहूहिं आप हरौ॥
जनम तौ ऐसेहिं बीत गयौ। 

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