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Wednesday, 25 July 2012

नज़र-ए-इनायत

आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक. 
कौन जीता है तेरे जुल्फ के सर होने तक. 

आशिकी सब्र तलब और तमन्ना बेताब, 
दिल का क्या रंग करूँ खून-ए-जिगर होने तक. 

हमने माना की तगाफुल' न करोगे लेकिन,
ख़ाक हो जावेंगे हम तुमको खबर होने तक. 

परतवे खूर' से है शबनम को फ़ना' की तालीम', 
मैं भी हूँ एक इनायत की नज़र' होने तक. 

गमेहस्ती का असद किससे हो जुज मर्ग' इलाज, 
शमअ हर रंग में जलती है सहर होने तक.

_____________शब्दार्थ_______________
| तगाफुल=नजरअंदाज | परतवे खूर=सूर्य की किरण | फ़ना=मिट जाना | तालीम=शिक्षा | नज़र=भेंट | जुज मर्ग=मौत के सिवाय | 
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