पढने और संकलन का शौक ही इस ब्लॉग का आधार है... महान कवि, शायर, रचनाकार और उनकी उत्कृष्ट रचनाएँ.... हमारे मित्र... हमारे गुरु... हमारे मार्गदर्शक... निश्चित रूप से हमारी बहुमूल्य धरोहर... विशुद्ध रूप से एक अव्यवसायिक संकलन जिसका एक मात्र और निःस्वार्थ उद्देश्य महान काव्य किवदंतियों के अप्रतिम रचना संसार को अधिकाधिक काव्य रसिकों तक पंहुचाना है... "काव्य मंजूषा"

Tuesday, 3 July 2012

गगन गुफा

रस गगन गुफा में अजर झरे. 
बिन बाजा झंकार उठे जंह 
समझि परे जब ध्यान धरे. 
रस गगन गुफा में अजर झरे. 

बिना ताल जंह कमल फुलाने
तेहि चढ़ि हंसा केलि करे,
बिन चन्दा उजियारी दरसे, 
जंह तंह हंसा नजर परे.
रस गगन गुफा में अजर झरे. 

दसवें द्वारे ताली लागे
अलख पुरुष जेंहि ध्यान धरे,
काल कराल निकट नहि आवे,
काम क्रोध मद लोभ जरे.
रस गगन गुफा में अजर झरे. 

जुगन जुगन की तृषा बुझाती
करम भरम अध ब्याधि टरे,
कहै कबीर सुनो भई साधो,
अमर होय कबहूँ न मरे.
रस गगन गुफा में अजर झरे. 
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