पढने और संकलन का शौक ही इस ब्लॉग का आधार है... महान कवि, शायर, रचनाकार और उनकी उत्कृष्ट रचनाएँ.... हमारे मित्र... हमारे गुरु... हमारे मार्गदर्शक... निश्चित रूप से हमारी बहुमूल्य धरोहर... विशुद्ध रूप से एक अव्यवसायिक संकलन जिसका एक मात्र और निःस्वार्थ उद्देश्य महान काव्य किवदंतियों के अप्रतिम रचना संसार को अधिकाधिक काव्य रसिकों तक पंहुचाना है... "काव्य मंजूषा"

Wednesday, 20 June 2012

एकांत संगीत ६

          किस ओर मैं? किस ओर मैं?

          है एक ओर असित निशा,
          है एक ओर अरुण दिशा,
पर आज स्वप्नों में फंसा, यह भी नहीं मैं जानता-
          किस ओर मैं? किस ओर मैं?

          है एक ओर अगम्य जल,
          है एक ओर सुरम्य थल,
पर आज लहरों से ग्रसा, यह भी नहीं मैं जानता-
          किस ओर मैं? किस ओर मैं?

          है हार एक तरफ पड़ी,
          है जीत एक तरफ खड़ी,
संघर्ष-जीवन में धंसा, यह भी नहीं मैं जानता-
          किस ओर मैं? किस ओर मैं? 

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