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Saturday, 30 June 2012

एकांत संगीत १८

विष का स्वाद बताना होगा !

ढाली थी मदिरा की प्याली,
चूसी थी अधरों की लाली,
कालकूट आनेवाला अब, देख नहीं घबराना होगा !
विष का स्वाद बताना होगा !

आँखों से यदि अश्रु छनेगा, 
कटुतर यह कटु पेय बनेगा,
ऐसे पी सकता है कोई, तुझको पी मुस्काना होगा !
विष का स्वाद बताना होगा !

गरल पान करके तू बैठा,
फेर पुतलियाँ कर-पग ऐंठा, 
यह कोई कर सकता, मुर्दे, तुझको अब उठ गाना होगा ! 
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